सोमवार, अगस्त 30, 2010

ओल्डएज होम का सच

इन दिनों oldage होम का काफी प्रचलित सब्ध हो गया है. बच्चे भी चाहते है उनके माँ बाप वहा जाकर रह.  आज किसी के पास इतना टाइम नहीं है की इन बुजुर्गो के लिए अपना दिमाग खपाए ....बीते एक वर्ष में मेरा संपर्क एक oldage  से हुआ जो की तिस हजारी कोर्ट के नजदीक है .. इससे पहले शायद मैं इस सब्ध अच्छी तरह से परिचित नहीं थी..लेकिन वहा जाकर जो देखा और जाना वो अश्चर्य करने वाला है.. राजनीती तो हर जगह होती है लेकिन oldage  होम की राजनीती   को पहली ही बार वहा के बुजुरो के मुह से ही सुना . 
पहले तो oldage  होम पर बहस सुनी की वो सही है या नहीं .. फसबूक पर अशोक चक्रधर ने सबकी राय ..इस विषय पर जाननी चाही थी तो लोगो ने अपने बिचारो की झड़ी  लगा दी. oldage होम चाहे बुरा हो या भला ..लेकिन हुजुर यह मत सोचिए  की वहा रहना बहुत  आसान है . वहा रहने के लिए आपको अची खासी कीमत चुकानी पड़ेगी  एक कमरे का हर महीने 1000 से ज्यादा का  किराया है. . साथ ही अगर आपका वहा अन्दर किसी से सोलिड साठ गांठ न हो तो भूल जाइये  की आपको वहा कमरा मिलेगा .. मान लीजये आपको कमरा भी मिल गया तो इसकी कोई गारंटी नहीं है की आपके साथ वहा भेदभाव न हो... एक बुजुर्ग महिला से मैंने पहली मुलाकात में जानना चाह तो उन्होंने मुझसे अपनी परेशानी बांटी.. आज के बच्चो  को यह समझने की जरुरत है इन्हें अपने बड़ो को वक़्त और अपना साथ देने चाहिए ... आज जो हम अपने बड़ो के साथ करेंगे वही आने वाली पीढ़ी हमारे साथ करेगी.. या हो सकता है इससे भी बुरा करे ...  

11 टिप्‍पणियां:

  1. seema,yah ek aisa vishay hai....jis par savendansheel hi hua jaa sakta hai basharte ham insaan hon.....aur yah savaal hamen apne-aap se hi karnaa hoga ki sachmuch ham insaan hain....to samsyaa rahegi hi nahin....!!!!

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  2. ये सच सारे आश्रमों का नहीं है। मैं खुद तीन जगह गई हूं जहां सभी बुजुर्ग बड़े प्यार से रहते हैं। जिनको दुख अपने ही बेटों से मिला लेकिन जो आपने लिखा है वो भी सच होगा। मेरी भी सभी से यह गुजारिश है कि अपने बूढ़े माता-पिता को लाचार न छोड़े...जहां आप पहुंचे है उनका हाथ है...तो आप भी उनका सहारा बनें।

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  3. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  4. ऐसे आश्रमो मे अक्सर भलाई के नाम पर बुराई को पाला जाता है. रहने वाले लोग ये ज्यादा अछी तरह जानते है!

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  5. Vradh aashram ke such ko tumne bilkul khare khare shabd diye hai ... Badhaaeee ... Likhtee rahe aur is kharepan ko nikhaartee rahe ... :)

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  6. लेख अच्छा है. मुझे तभी भारतीय वर्ण-आश्रम व्यवस्था याद आयी जिसमें वानप्रस्थ आश्रम में स्वयं व्यक्ति घर से विरक्त हो जाया करता था. लेकिन आज बच्चे उन्हें उनके अधिकारों से जबरन विलग कर देते हैं — यह भी गलत है.

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  7. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

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  8. दूसरी हाजिरी :
    आज जो हम अपने बड़ो के साथ करेंगे वही आने वाली पीढ़ी हमारे साथ करेगी.. या हो सकता है इससे भी बुरा करे ...
    @ कृपया बीमा-प्रतिनिधि की तरह ना बोलें. आपने अपनी बात का अंत काफी भयावय किया है. इन बातों के भय से पॉलिसी करवाने वालों की संख्या बढ़ रही है.

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